भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त हुई कलयुग की सीता
12 सितंबर 2015 को सुनियोजित तरीके से लोकायुक्त टीम द्वारा कराए गए थे ट्रेप-------
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रीवा की न्यायालय ने किया बरी-------
मनगवां ---- त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की अर्धांगिनी पवित्र सीता मां को बार-बार अपनी सत्यता की परीक्षा देते देते अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी। उसी तरह मनगवा नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष सीता साकेत भी अपनी सत्यता की परीक्षा देते- देते भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त हो गई हैं । मनगवां की ऐतिहासिक धरोहर मलकपुर तालाब में घाट निर्माण का कार्य कराया गया था। उक्त कार्य के लिए संबंधित ठेकेदार कैलाश प्रसाद मिश्रा को ₹239852 स्वीकृत किए गए थे । जिसके एवज में ठेकेदार कैलाश प्रसाद मिश्रा ने आरोप लगाया कि नगर परिषद मनगवां की अध्यक्ष सीता साकेत ₹10,000 रिश्वत की मांग कर रही हैं । जिसकी शिकायत कैलाश प्रसाद मिश्रा ने लोकायुक्त पुलिस रीवा से कर दी थी। जिसके बाद लोकायुक्त पुलिस रीवा ने 12 सितंबर 2015 को मनगवां फ्लाईओवर के पास से सुनियोजित तरीके से नगर पंचायत अध्यक्ष मनगवां पति विवेक साकेत को सुनियोजित तरीके से ₹10,000 लेते हुए ट्रेप किया था। जिस पर लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7,13(1)(डी)(एक)सहपाठित धारा 13(2)तथा धारा 10 के अंतर्गत अपराध प्रकरण क्रमांक 426 / 2015 दर्ज किया था।
जिस के बाद मनगवा नगर परिषद की राजनैतिक हवा बदली और नगर परिषद अध्यक्ष सीता साकेत को कुछ दिनों बाद ही अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया था। जिसके विरोध में सीता साकेत में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। तब उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश एसके सेठ एवं एचपी सिंह की युगल पीठ ने 21 जून 2017 को सीता साकेत को पुनः अध्यक्ष पद पर बैठने के लिए आदेश दिया। तथा मध्य प्रदेश शासन के इस लापरवाही पूर्ण निर्णय के लिए ₹10000 जुर्माना भी विद्वान न्यायाधीश ने लगाया था । जिसके बाद मनगवा नगर में एक बार पुनः राजनैतिक करवट बदलता रहा । जिसके बाद 12 जुलाई 2021 सोमवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रीवा की न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश गिरीश दीक्षित की कोर्ट ने ₹10,000 की रिश्वत के आरोप में सीता साकेत पति विवेक साकेत उम्र 28 वर्ष एवं विवेक साकेत पिता राम किशोर साकेत उम्र 30 वर्ष निवासी डीहा मनगवा को बरी कर दिया गया है। जिसके बाद एक बार पुनः मनगवा के राजनैतिक गलियारों में हलचल सी मच गई है। ज्ञात हो कि सीता साकेत कांग्रेस पार्टी के सिंबल पर नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीती थी। जब पूरे प्रदेश एवं देश में भाजपा की सरकार है , और मनगवा में कांग्रेस पार्टी से नगर पंचायत अध्यक्ष है।यह बात कुछ भाजपाइयों को नागवार गुजर रही थी। इसलिए तथाकथित भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने इस तरह का कृत्य किया गया। उक्त आरोप पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सीता साकेत के पति विवेक साकेत ने लगाए हैं।
सत्य की हुई की हुई जीत ----डॉ एसएस तिवारी
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश गिरीश दीक्षित द्वारा दिए गए निर्णय को सत्य की जीत बताते हुए बैकुंठपुर कृषि उपज मंडी के पूर्व उपाध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ एस.एस. तिवारी ने बताया कि सत्य परेशान तो हो सकता है लेकिन पराजित नहीं । एक बार फिर सीता साकेत पर लगे आरोप पूरी तरह से निराधार हो गए हैं और अब से भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्त होकर निश्चित ही सत्य की विजय हुई है । विरोधियों ने जिस तरह षडयंत्र पूर्वक सीता साकेत एवं मनगवा की जनता का अपमान किया है , उसका प्रतिफल उन्हें अवश्य ही मिलेगा।
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