★नेशनल हाइवे सात में फोरलेन सड़क निर्माण कार्य वर्ष 2012 में प्रारंभ कराया गया था।
★हाइवे के किनारे करीब सौ वर्ष से भी पुराने हजारों फलदार एवं छायादार पेड़ लगे हुए थे।
★सड़क को फोरलेन बनाने के लिए हाइवे को चौड़ा किया गया। जिसके चलते अकेले रीवा से कटनी और रीवा से पन्ना के बीच में ही 5 हजार से ज्यादा पेड़ो को काटा गया। उसके बदले में अभी तक पेड़ नहीं लगाए गए हैं।
★सड़क निर्माण करने वाली कंपनी को पेड़ काटने के बदले दस गुना पौधे लगाने के लिए आदेश जारी किए गए थे। पेड़ काटने की अनुमति के साथ ही यह भी कहा गया था कि हर वर्ष कितनी संख्या में छायादार और फलदार पेड़ ही लगाना है।
★ठेका कंपनी द्वारा हजारों छायादार और फलदार पेड़ के बदले कुछ कुछ जगहों पर ही बोगन बेलिया और कनेर जैसे झाड़ीदार पेड़ लगा खानापूर्ति कर रही है।
★काटे गए पुराने पेड़ो के बदले नए पेड़ लगवाने और उसके सुपरवीजन की जवाबदेही सरकारी विभाग को सौंपी गई थी। लेकिन कागजी खानापूर्ति के अलावा जिम्मेदारों ने आज तक कुछ नही किया।
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