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Supreme Court on SC/ST Act: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला अब आसानी से नहीं लगेगा एक्ट्रो सिटी एक्ट

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Monday, July 19, 2021


सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला अब आसानी से नहीं लगेगा एक्ट्रो सिटी एक्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने जस्टिस एल नागेश्वर की अगुवाई वाली पीठ में कहा एससी एसटी एक्ट के तहत कोई प्रकरण अपराध सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं किया जाएगा कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति जनजाति का है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया विवाद का कारण जाति संबंधी नहीं है, कोई और है तो एक्ट्रो सिटी एक्ट का उपयोग नहीं किया जा सकता। जस्टिस एल नागेश्वर वाली पीठ ने आगे यह भी कहा यदि घटनास्थल सार्वजनिक नहीं है तो एससी एसटी एक्ट लागू नहीं होगा। महज़ शिकायत के आधार पर इस अधिनियम का उपयोग नहीं किया जा सकता। सर्वोच्च अदालत ने कहा यदि कोई सामान्य जाति का व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा में कोई कदम उठाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके ऊपर स्वत एससी एसटी एक्ट के तहत अपराधिक कृत्य की तलवार लटक जाए।उच्च जाति के लोगों के अधिकारों के संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, 'एससी/एसटी ऐक्ट के तहत कोई अपराध इसलिए नहीं स्वीकार कर लिया जाएगा कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति का है, बशर्ते यह यह साबित नहीं हो जाए कि आरोपी ने सोच-समझकर शिकायतकर्ता का उत्पीड़न उसकी जाति के कारण ही किया हो।' एसटी/एसटी समुदाय के उत्पीड़न और उच्च जाति के लोगों के अधिकारों के संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी काफी क्रांतिकारी मानी जा रही है।

उच्च जाति के व्यक्ति एससी/एसटी समुदाय जो व्यक्ति को गाली भी थे तब भी एट्रोसिटी एक्ट लागू नहीं होता
तीन सदस्यीय पीठ की तरफ से लिखे फैसले में जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि उच्च जाति के व्यक्ति ने एससी/एसटी समुदाय के किसी व्यक्ति को गाली भी दे दी हो तो भी उस पर एससी/एसटी ऐक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती है। हां, अगर उच्च जाति के व्यक्ति ने एससी/एसटी समुदाय के व्यक्ति को जान-बूझकर प्रताड़ित करने के लिए गाली दी हो तो उस पर एससी/एसटी ऐक्ट के तहत कार्रवाई जरूर की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि जब तक उत्पीड़न का कोई कार्य किसी की जाति के कारण सोच-विचार कर नहीं किया गया हो तब तक आरोपी पर एससी/एसटी ऐक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

घटनास्थल यदि सार्वजनिक नहीं तो SC-ST एक्ट लागू नहीं
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि उच्च जाति का कोई व्यक्ति अगर अपने अधिकारों की रक्षा में कोई कदम उठाता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसके ऊपर स्वतः एससी/एसटी ऐक्ट के तहत आपराधिक कृत्य की तलवार लटक जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसलों पर फिर से मुहर लगाते हुए कहा कि एससी/एसटी ऐक्ट के तहत उसे आपराधिक कृत्य ठहराया जा सकता है जिसे सार्वजनिक तौर पर अंजाम दिया जाए, न कि घर या चहारदिवारी के अंदर जैसे प्राइवेट प्लेस में।

सिर्फ शिकायत के आधार पर एससी-एसटी एक्ट नहीं लगाया जा सकता

बेंच ने यह टिप्पणी एक पुरुष को एक महिला को जाति संबंधी गाली देने के लिए आपराधिक आरोप से मुक्त करते हुए दी। पीठ ने कहा कि आरोपी पुरुष और शिकायतकर्ता महिला के बीच उत्तराखंड में जमीन की लड़ाई चल रही थी। दोनों ने इस संबंध में एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा रखा था। बाद में महिला ने यह कहते हुए एससी/एसटी ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया कि पुरुष ने सहयोगियों के साथ मिलकर महिला को खेती करने से बलपूर्वक रोक दिया और उन्होंने महिला को जाति संबंधी गालियां भी दीं।

विवाद का कारण जाति आधारित नहीं तो SC-ST एक्ट नहीं
मामले में तथ्यों की पड़ताल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुरुष पर घर की चहारदिवारी के अंदर गाली-गलौज करने का आरोप है, न कि सार्वजनिक तौर पर। इसलिए, उसके खिलाफ एससी/एसटी ऐक्ट के तहत कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक कोई व्यक्ति एससी/एसटी समुदाय के व्यक्ति को उसे जाति के आधार पर प्रताड़ित करने की मंशा से भला-बुरा नहीं कहता है और जब तक उत्पीड़न की घटना का कोई गवाह नहीं हो, तब तक किसी उच्च जाति के व्यक्ति के खिलाफ एससी/एसटी ऐक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

एससी एसटी एक्ट से बचने के उपाय / सुप्रीम कोर्ट ने मामला खारिज कर दिया

बेंच ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारक) कानून की धारा-3 (1) के तहत याचिकाकर्ता आरोपी के खिलाफ मामला नहीं बनता और आरोप पत्र खारिज किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अपने पहले के फैसले का हवाला दिया और कहा कि पब्लिक प्लेस को बताया था और कहा था कि अगर घर के बाहर जैसे किसी घर के सामने उसके कैंपस में अपारध किया जाता जिसे घर के बाहर की सड़कों से देखा जा सकता है तो वह निश्चित तौर पर पब्लिक प्लेस माना जाएगा क्योंकि कोई भी देख सकता है। मौजूदा मामले में घर के अंदर महिला को गाली देने का आरोप है और यह कथित मामला ऐसा नहीं है कि किसी के सामने हुई हो।

Ramesh Pokhariyal Resigns:Bjp मंत्रिमंडल से शिक्षा मंत्री dr ramesh Pokhriyal की छुट्टी

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Wednesday, July 7, 2021

Bjp मंत्रिमंडल से शिक्षा मंत्री dr ramesh Pokhriyal की छुट्टी 

रमेश पोखरियाल ने कैबिनेट विस्तार के बीच दिया इस्तीफा और स्वास्थ कारण कारणों को दिया हवाला
 कुछ दिन पहले रमेश पोखरियाल करोना के चलते एम अस्पताल में भर्ती हुए थे और तबियत बिगड़ने पर उनको 15 दिन आईसीयू में भी रहना पड़ा था  बता दे कैबिनेट विस्तार में कई मंत्रियों के 30 की के इस्तीफे की खबर सामने आ रही है और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने स्वास्थ को कारण बता के इस्तीफा दे दिया है।

CBSE Update:सीबीएसई ने 10वीं-12वीं के बोर्ड के लिए नई स्कीम का किया ऐलान, साल में दो बार होंगी परीक्षाएं

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Monday, July 5, 2021


सीबीएसई ने 10वीं-12वीं के बोर्ड के लिए नई स्कीम का किया ऐलान, साल में दो बार होंगी परीक्षाएं

सीबीएसई ने कहा है कि एकेडमिक सेशन 2021-22 दो टर्म में विभाजित होगा. प्रत्येक टर्म में करीब 50-50 फीसदी सिलेबस कवर होगा. जानकारी के अनुसार सीबीएसई पहले टर्म की परीक्षाएं नवंबर-दिसंबर में आयोजित करेगा. जबकि दूसरे टर्म की परीक्षा मार्च-अप्रैल में होगी. बोर्ड ने यह भी कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2021-22 के पाठ्यक्रम को विषय विशेषज्ञों द्वारा अवधारणाओं और विषयों के परस्पर संबंध को देखते हुए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण का पालन करते हुए दो अवधि में विभाजित किया जाएगा

UP News: मोहन भागवत हिंदू मुस्लिम का डीएनए एक वाले बयान पर, बीएसपी सुप्रीमो मायावती का तंज ‘मुंह में राम बगल में छुरी'

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BSP सुप्रीमो मायावती ने कहा की बीजेपी आर एस एस के एजेंडे पर काम कर रही हैऔर चुनावी लाभ लेने के लिए धर्मांतरण का मुद्दा बना रही है अगर इनके बयान में सच्चाई है तो आरोपियों को सजा मिलनी चाहिए पर पूरे मुस्लिम समाज को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए ।

बीएसपी सुप्रीमो मायावती नेे आर एस एस के प्रमुख मोहन भागवत के बयान हिंदू और मुस्लिम दोनों का डीएनए एक है पर पलटवार करते हुए मायावती जी ने कहां की मोहन भागवत का बयान मुंह में राम बगल में छुरी जैसा है। RSS संघ और बीजेपी की कथनी और करनी में अंतर है। मायावती जी ने यह सब आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह रही थी।

मायावती ने कहा की RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने कल एक कार्यक्रम में भारत में सभी धर्मों के लोगों का डीएनए एक होने की बात किसी के भी गले के नीचे आसानी से उतरने वाली नहीं हैै। आर एस एस और बीजेपी एंड कंपनी के लोगों तथा इनकी सरकारों की कथनी और करनी में अंतर है। और मायावती जी ने कहा की केंद्र और उत्तर प्रदेश में जहां उनकी सरकारेंचल रही है, वे भारतीय संविधान कि सही मानवतावादी मनसा पर चलने के बजाय आर एस एस के संकीर्ण एजेंडे पर चल रही है,यह आम चर्चा है। और मायावती ने कहा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आर एस एस के सहयोग और समर्थन के बिना बीजेपी का अस्तित्व कुछ भी नहीं है। फिर भी r.s.s. अपनी कही हुई बातों को बीजेपी और उनकी सरकारों से लागू क्यों नहीं करवा पा रही है।

मायावती ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहां की भाजपा चुनावी लाभ के लिए धर्मांतरण का मुद्दा बना रही है।
अगर ऐसा कहीं कुछ है तो आरोपियों को सजा मिलनी चाहिएपर पूरे मुस्लिम समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

मायावती ने कहा कि यूपी में आज अफरा तफरी का माहौल हैै। बीएसपी हमेशा से ही बीजेपी और आर एस एस की नीतियों का विरोध करती आ रही है। भाजपा सरकार आर एस एस की एजेंटों पर काम कर रही है।

MP News: MP में देश की औसत से दोगुना हैं,दलितों पर अत्याचार के मामले।

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Sunday, July 4, 2021

देवास, शाजापुर की घटना के बाद उठे सवाल, MP में देश की औसत से दोगुना हैं दलितों पर अत्याचार के मामले

भोपाल


मध्यप्रदेश में एक बार फिर दलितों को लेकर सियासत गरमाई हुई है. देवास के नेमावर में एक ही दलित परिवार के पांच सदस्यों की हत्या कर जमीन में गाड़ने की घटना को अब कांग्रेस सियासी मुद्दा बना रही है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ 5 जुलाई को नेमावर जाने वाले हैं. कमलनाथ के इस कदम को लेकर बीजेपी उन पर पलटवार कर रही है

MP में दलित अपराधों का क्राइम रेट देश से दोगुना

सियासी बयानबाजी के बीच एनसीआरबी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. दलित अपराध के मामले में मध्य प्रदेश टाॅप 5 राज्यों में शामिल है. यह आंकड़े न बीजेपी की सरकारों में कम हुए और न ही कांग्रेस की 15 माह की सरकार में. 2019 में मध्य प्रदेश में दलितों के खिलाफ 5300 मामले हुए. दलितों से अपराध में मध्य प्रदेश का क्राइम रेट देश के औसत से दोगुना है. दलित अपराध में देश का औसत 21 फीसदी है, जबकि मध्यप्रदेश की अपराध दर करीबन 42 फीसदी है

हर साल बढ़ रहे हैं दलितों पर अत्याचार के मामले

MP में पिछले दिनों हुई बड़ी घटनाएं

1 जुलाई 2021 - शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र के ग्राम बिजाना में दबंगों ने धोखाधड़ी कर दलित की जमीन पर कब्जा किया. दलित ने विरोध किया तो वृद्ध पति-पत्नी और उसकी बहू के साथ मारपीट की गई और दलित को पेड़ से बांध दिया गया

30 जून 2021 - देवास के नेमावर में दलित आदिवासी वर्ग के 5 सदस्यों की हत्या कर उनके शवों को खेत में 10 फीट गहरे गड्ढे में दफना दिया. यह सभी 47 दिनों से लापता थे

1 जून 2021 - जबलपुर के खामरिया गांव में रहने वाले दलित युवक का सिर मुंडाकर और गले में जूते-चप्पल की माला पहनाकर पूरे गांव में घुमाया गया. इस मामले में आरोप है कि दलित युवक को उच्च जाति की लड़की से प्रेम करने की सजा दी गई

28 मई 2021 - खजुराहो से सटे एक गावं में दबंगों ने गभवर्ती महिला के साथ उसके बच्चों के सामने दुष्कर्म किया गया. पीड़ित परिवार को चार दिनों तक बंधक बनाकर भी रखा गया

21 अप्रेल 2021 - विदिशा के कुरवाई थाना क्षेत्र जमीन विवाद में 65 साल के दलित की हत्या कर दी गई. दलित ने समाज द्वारा बनाए गए मंदिर को तोड़ने से रोका था

देश में सबसे ज्यादा MP में हो रहा दलित-आदिवासियों से रेप

हर साल बढ़ रहे हैं अत्याचार के मामले

मध्य प्रदेश में दलित अत्याचार के मामले देश के औसत से करीब दो गुना है. देश का औसत 21 फीसदी है, जबकि मध्य प्रदेश में अपराध की दर 42 फीसदी है. देश में होने वाले दलित अपराधों में 11 फीसदी मामले मध्य प्रदेश में घटित होते हैं. मध्यप्रदेश में दलितों की आबादी करीब सवा करोड़ है. पिछले सालों में हुए दलित अपराध के आंकड़ों स्थिति की भयानकता को दर्शा रहे हैं

2019 - 5300 दलित अपराध के मामले दर्ज हुए

2018 - 4753 दलित अपराध के मामले दर्ज हुए

2017 - 5892 दलित अपराध के मामले दर्ज हुए

2016 - 4922 दलित अपराध के मामले दर्ज हुए

दलित-आदिवासी महिलाओं से रेप के मामले में भी एमपी अव्वल

दलित बच्चियों से रेप, छेड़खानी के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले नंबर पर है. आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो 2019 में मध्य प्रदेश में दलित बच्चियों के साथ रेप की 214 घटनाएं हुई, जो अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा थी. यही स्थिति आदिवासी महिलाओं से बलात्कार के मामलों में भी है. 2019 में एमपी में आदिवासी महिलाओं से बलात्कार के 1 हजार 922 मामले सामने आए थे. चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि आदिवासी महिलाओं से बलात्कार के 83 फीसदी मामलों में अपराधी बरी हो जाते हैं. सिर्फ 17 फीसदी अपराधियों पर ही अपराध साबित हो पाता है. इस तरह प्रदेश में आदिवासियों पर अपराध के मामले में सजा दिलाए जाने की दर यानी कन्विक्शन रेट सिर्फ 17 फीसदी है

5 जुलाई को नेमावर जाएंगे पूर्व सीएम कमलनाथ

प्रदेश में दलित अपराधों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर हमलावर है.पिछले दिनों नेमावर में हुई घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को पत्र लिखकर निशाना साधा है. उन्होंने घटना की सीबीआई जांच तक की मांग की. कमलनाथ घटना को लेकर 5 जुलाई को नेमावर भी जा रहे हैं. कांग्रेस की महिला नेत्री विभा पटेल ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और यही वजह है कि नेमावर जैसी घटनाएं हो रही हैं

कांग्रेस लाशों पर राजनीति कर रही है: बीजेपी

कमलनाथ के नेमावर जाने को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है. शिवराज सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार करते हुए कहा है कि जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे, तब उनके निवास से कुछ दूर 3 घटनाएं हुई थी. तब भी वे बंगले से बाहर नहीं निकले. सारंग ने कहा कि कांग्रेस लाशों पर राजनीति कर रही है. सरकार ने नेमावर में दोषियों को पकड़ा गया है, दोषियों पर फास्ट ट्रेक में कार्यवाही होगी

देश में जानलेवा कोरोना वायरस की रफ्तार अब धीमी पड़ रही

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Friday, July 2, 2021

देश में जानलेवा कोरोना वायरस की रफ्तार अब धीमी पड़ रही है. देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 46 हजार 617 नए मामले सामने आए हैं. वहीं, 853 लोगों की मौत हो गई. जिसके बाद कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा आज चार लाख के पार पहुंच गया है. भारत में लगातार चौथे दिन कोरोना मामले 50 हजार से कम दर्ज हुए हैं और मौत का आंकड़ा भी कम हुआ है. कल 59 हजार 384 लोग ठीक हुए हैं. जानिए आज देश में कोरोना की ताजा स्थिति क्या है.

भारत में डॉ बिधान चन्द्र रॉय के सम्मान में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 1 जुलाई को मनाया जाता है।

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Thursday, July 1, 2021

                                      Rewa Times Now
उनका जन्म भी एक जुलाई को हुआ, देहावसान भी। 
जन्म:1 जुलाई, 1882 - मृत्यु: 1 जुलाई, 1962
आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक वरिष्ठ चिकित्सक, विद्वान शिक्षाविद, निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी, कुशल ज्ञराजनीतिज्ञ और प्रसिद्ध समाज सेवक थे। आप पश्चिम बंगाल के द्वितीय मुख्यमंत्री थे।

सभी चिकित्सकों को चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएं....

चंद्रशेखर आजाद - उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रोकने के लिए हर कोशिश करूंगा, BSP से गठबंधन के लिए तैयार हूं।

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Tuesday, June 29, 2021

अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इस चुनाव के लिए विपक्ष ने भी कमर कस ली है और सत्ता में बैठी हूं बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए जुगत में लग गई हैइसी बीच भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के चीफ चंद्र शेखर आजाद ने कल एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में कहां है कि हमारी पार्टी बीजेपी को सत्ता मे वापस लौटने से रोकने के लिए हर संभव प्रयत्न करेगी साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हम मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से भी गठबंधन करने के लिए तैयार हैं।


चंद्रशेखर ने कहा कि बीजेपी को रोकने के लिए बने बड़े गठबंधन

चंद्रशेखर ने कहा "प्रदेश में बदहाली है" यहां जिला पंचायत के चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है। हम लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ाई लड़ेंगे और 1 जुलाई से साइकिल यात्रा पर जाएंगे और उन्होंने कहां की हम उत्तर प्रदेश मे जनता के मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे। मैं चाहता हूं कि प्रदेश में बीजेपी को रोकने के लिए एक बड़ा गठबंधन बने मैं इसके पहल किस लिए कर रहा हूं क्योंकि मुझे उत्तर प्रदेश की चिंता है

चंद्रशेखर से जब पूछा गया कि वह यूपी में किस दल के साथ जाना पसंद करेंगे तो उन्होंने कहा कि जिन दलों या साथियों की मदद से उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रोका जा सकेे, हम उनके साथ जाएंगे, जो भी दल जनता के मुद्दों पर चुनाव लड़ेगा हम उनके साथ गठबंधन , "मैं चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश की सभी बड़ी पार्टियां एक बड़ा गठबंधन बनाएं" हालांकि उन्होंने कहा कि अगर सभी पार्टी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री बनने की कोशिश करेंगे तो फिर गठबंधन का हाल बेहाल हो जाएगा।

चुनाव से पहले सकारात्मक गठबंधन बनने की उम्मीद - आजाद 

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कोई बीजेपी विरोधी दल ऐसा नहीं है
जिससे मेरी बात ना चल रही हो मैं उनसे भी बड़ा गठबंधन बनाने की बात करता हूं उन्होंने कहा चुनाव अभी दूर है मुझे उम्मीद है कि चुनाव से पहले एक सकारात्मक बनेगा और मैं इस गठबंधन में रहकर गांव-गांव घूमकर लोगों को तैयार करूंगा।

मायावती से जुड़ने के लिए तैयार - आजाद

मायावती की पार्टी बीएसपी से गठबंधन पर चंद्रशेखर ने कहा - बीएसपी ने मैदान छोड़ दिया है मायावती से मेरी वैचारिक लड़ाई है उनसे कोई निजी लड़ाई नहीं है अगर वह मेरे साथ कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के लिए राजी है तो मैं उनके साथ भी गठबंधन के लिए तैयार हूं मैं मायावती का सम्मान करता हूं हमारे साथ जोड़ने से उनको बल मिलेगा इसके बाद बीजेपी के लोग उन पर दबाव नहीं डाल पाएंगे।

तीरंदाजी विश्व कप प्रतियोगिता में तीन गोल्ड मेडल जीतकर दीपिका कुमारी ने इतिहास रच दिया।

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आदिवासी जनजाति से बिलॉन्ग करने वाली दीपिका कुमारी महतो 2012 से इंटरनेशनल तीरंदाजी खिलाड़ी हैं. कल उन्होंने तीरंदाजी विश्व कप प्रतियोगिता में तीन गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.

दीपिका कुमारी महतो द्वारा 2012 से 2021 के बीच जीते गए गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मैडल की सूची.

वर्ल्ड कप में - 10 गोल्ड, 13* *सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज.
एशियन गेम्स - 1 ब्रॉन्ज.
कॉमनवेल्थ गेम्स - 2 गोल्ड.
एशियाई चैंपियनशिप - 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, गोल्ड 1.
वर्ल्ड चैंपियनशिप - 2 सिल्वर.

अपने खेल जीवन में कुल 37 गोल्ड मेडल जीतने वाली दीपिका कुमारी महतो का जन्म झारखंड में जनजाति परिवार में हुआ. पिता शिवनारायण महतो ऑटो चालक और माता रांची मेडिकल कॉलेज में नर्स थीं.

आम खाने की लालच में आम के पेड़ों पर निशाना साधने लगीं. सटीक निशाना साधने के गुण के तीरंदाज बनने के आकांक्षा को जन्म दिया. माता पिता की माली हालत खराब थी वे अपनी बेटी का उत्साह तो बढ़ा सकते थे लेकिन ओलंपिक वाली महंगी धनुष बाण खरीदकर नही दे सकते थे.

दीपिका ने एकलव्य की तरह अपने धनुष बाण परंपरागत तरीके बांस से बनाकर अभ्यास करने लगी. तीरंदाज चचेरी बहन विद्या कुमारी की हौसला अफजाई से टाटा तीरंदाजी एकेडमी में दाखिला लिया. इसके बाद दीपिका कुमारी महतो अपनी काबिलियत के बल पर देश का नाम रोशन करते गयीं.

लेकिन उन्हें वह साइना नेहवाल और पीवी सिंधू की तरह पद सम्मान प्यार और पब्लिसिटी नही मिली जिसकी वो हकदार हैं.

सरकार ने दिया 6.29 लाख करोड़ का राहत पैकेज : वित्त मंत्री

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Monday, June 28, 2021


 नई दिल्ली
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार ने 6.29 लाख करोड़ के राहत पैकेज का एलान किया है. इसमें कोरोना वायरस (कोविड-19) से प्रभावित क्षेत्रों को 1.1 लाख करोड़ रुपये के लोन गारंटी स्कीम का प्रमुख है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक टूर-ट्रैवल के लिए भी राहत पैकेज का एलान किया गया है.मेडिकल की सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं

मीडिया से बात करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि एक बार अंतरराष्ट्रीय यात्रा फिर से शुरू होने के बाद, भारत आने वाले पहले पांच लाख पर्यटकों को वीजा शुल्क नहीं देना होगा. योजना 31 मार्च, 2022 तक लागू रहेगी, या पहले पांच लाख वीजा के वितरण के बाद बंद कर दी जाएगी.एक पर्यटक केवल एक बार लाभ उठा सकता है

पर्यटन क्षेत्र के लिए एक नई योजना की घोषणा की गई

इस योजना के तहत 11,000 से अधिक पर्यटक गाइडों को 100 प्रतिशत गारंटी के साथ वित्तीय सहायता दी जाएगी. एजेंसी के लिए 10 लाख रुपये, जबकि टूरिस्ट गाइड के लिए 1 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा.सरकार के अनुमान के मुताबिक इससे 10,700 से अधिक पंजीकृत पर्यटक गाइडों को मदद मिलेगी. यह योजना पर्यटन मंत्रालय द्वारा नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से प्रशासित की जाएगी. इसका कुल वित्तीय निहितार्थ 100 करोड़ रुपये है.सरकारी अनुमानों के अनुसार, 2019 में 10.93 मिलियन पर्यटक भारत आए,30 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक खर्च करते हुए,औसत पर्यटक प्रति दिन 2,400 रुपये खर्च करते हैं

क्रेडिट गारंटी योजना से मिलेगा लाभ

सरकार का कहना है कि तीन साल के लिए लाई गई क्रेडिट गारंटी योजना से 25 लाख लोगों को लाभ मिलेगा. नई क्रेडिट गारंटी योजना के तहत ब्याज दर 3 साल की ऋण अवधि के साथ आरबीआई द्वारा निर्धारित दर से 2% कम है. नई क्रेडिट गारंटी योजना छोटे शहरों सहित भीतरी इलाकों के छोटे से छोटे कर्जदारों तक भी पहुंचेगी. ECLGS के तहत अतिरिक्त 1.5 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी योजना की घोषणा की गई

मीडिया को संबोधित करतीं वित्त मंत्री

पहले 3 लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) में से 2.69 लाख करोड़ पहले ही उपयोग किए जा चुके हैं. यह योजना MSMEक्षेत्र की ओर लक्षित है. अब तक 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (public sector banks), 25 निजी बैंकों और 31 गैर-बैंकिंग वित्त निगमों (NBFC) ने इस योजना में भाग लिया

ऋण सुविधा गारंटी योजना का दायरा बढ़ा

वित्त मंत्री ने कहा कि आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना का दायरा बढ़ाया जा रहा है, इस योजना के तहत एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम), अन्य क्षेत्रों को बिना किसी गारंटी के कर्ज उपलब्ध कराया गया है उन्होंने कह कि 1.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना की घोषणा की वित्त मंत्री ने कोविड-प्रभावित क्षेत्र के लिये 1.01 लाख करोड़ रुपये की रिण गारंटी योजना घोषित की. इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र को 100 करोड़ रुपये तक का कर्ज 7.95 प्रतिशत की ब्याज दर पर दिया जायेगा

आत्मनिर्भर भारत योजना का विस्तार

सरकार ने आत्मनिर्भर भारत योजना का विस्तार किया है, जिसकी घोषणा पहले आत्मानिर्भर भारत के तहत की गई थी. सरकार ने 58.5 लाख लाभार्थियों के लिए 22,810 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी. इस योजना में, सरकार 12+12% ईपीएफओ योगदान (यदि 1000 से कम कर्मचारी हैं) और 1000 रुपये से अधिक श्रमिकों के मामले में 12% कर्मचारी योगदान की सब्सिडी देती है. विस्तारित योजना मार्च 2022 तक लागू रहेगी.रबी सीजन में गेहूं की खरीद 19-20 में 389.92 लाख टन से बढ़कर 432.48 लाख टन 21-22 हो गई

गरीब कल्याण अन्न योजना पर खर्च बढ़ा

सीतारमण ने बताया कि सरकार ने अब तक पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना पर 1,33,972 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2021 तक योजना को बढ़ा दिया है विस्तार में 93,869 करोड़ का वित्तीय निहितार्थ है दो वित्तीय वर्षों में योजना पर कुल प्रभाव 2,27,481 करोड़ होगा

NERAMC को किया जाएगा पुनर्जीवित

सरकार 77.45 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम लिमिटेड ( North Eastern Regional Agricultural Marketing Corporation Ltd) को पुनर्जीवित करेगी. इसमें 75 किसान उपज और 13 भौगोलिक संकेत (Geographical indication) प्रमाणित फसलें शामिल हैं जो उत्तर पूर्व के लिए विशिष्ट हैं

एनईआईए को समर्थन

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय निर्यात बीमा खाते (National Export Insurance Account ) के माध्यम से निर्यात को समर्थन देने के लिए 33,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे. अब तक एनईआईए ट्रस्ट ने 52,860 करोड़ रुपये की 211 परियोजनाओं का समर्थन किया है भविष्य में यह अगले पांच वर्षों में 33,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का समर्थन करेगा

ईसीजीएस में निवेश

सरकार निर्यात बीमा कवर को बढ़ावा देने के लिए पांच वर्षों में इक्विटी एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (equity Export Credit Guarantee Corporation) के रूप में 88,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. ईसीजीएस भारत के लगभग 30% व्यापारिक निर्यात का समर्थन करता है

डिजिटल इंडिया को बढ़ावा

डिजिटल इंडिया पहल ( Digital India initiative) को बढ़ावा देने के लिए, भारतनेट को 19,041 रुपये का आवंटन किया गया था, जो कि 2017 में पहले 42,068 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था.इससे कुल राशि 61,109 करोड़ रुपये हो जाती है. यह राशि 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड (broadband) का विस्तार करने के लिए खर्च की जाएगी. 31 मई 2021 तक 1.56 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को 31 मई 2021 तक सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है.

प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव योजनाका विस्तार

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (electronics manufacturing sector) के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का कार्यकाल एक साल के लिए 2025-26 तक बढ़ा दिया गया है. घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत पीएलआई योजना की घोषणा की गई थी. केंद्रीय बजट 2021-22 पेश करते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1.97 लाख करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के साथ पीएलआई योजना को 13 क्षेत्रों में विस्तारित किया

देश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से पहले इसका डेल्टा प्लस वेरिएंट चिंता का सबब बना हुआ है

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Sunday, June 27, 2021

देश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से पहले इसका डेल्टा प्लस वेरिएंट चिंता का सबब बना हुआ है. भारत में पहली बार मिले डेल्टा वेरिएंट को कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था. अब इस डेल्टा प्लस वेरिएंट को भी बेहद खतरनाक बताया जा रहा है जो देशभर में तेजी से पांव पसार रहा है. राजस्थान में भी कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट का पहला मामला सामने आया है. 

यहां बीकानेर में एक 65 वर्षीय महिला में इसकी पुष्टि हुई है. खास बात ये है कि इस महिला को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी थी और वो कोरोना से रिकवर भी हो चुकी है।

पीएम मोदी जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं से मिले, कहा- खत्म हो 'दिल्ली और दिल' की दूरी

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Thursday, June 24, 2021

 


पीएम मोदी जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं से मिले, कहा- खत्म हो 'दिल्ली और दिल' की दूरी


जम्मू-कश्मीर के 14 शीर्ष नेताओं के साथ बैठक में पीएम मोदी ने आज प्रदेश के नेताओं को आश्वस्त करने की कोशिश की. बैठक में शामिल नेताओं के मुताबिक पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली और दिल की दूरी खत्म करना चाहती है. बैठक के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, 'जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं के साथ आज की बैठक एक विकसित और प्रगतिशील जम्मू-कश्मीर की दिशा में चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाया गया है.
पीएम मोदी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन तेज गति से होना चाहिए ताकि चुनाव हो सकें और जम्मू-कश्मीर को एक चुनी हुई सरकार मिले जो जम्मू-कश्मीर के विकास पथ को ताकत दे
पीएम मोदी ने अपने तीसरे ट्वीट में लिखा, 'हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत एक मेज पर बैठने और विचारों का आदान-प्रदान करने की क्षमता है. मैंने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा कि लोगों को, खासकर युवाओं को जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक नेतृत्व देना है और यह सुनिश्चित करना है कि उनकी आकांक्षाएं पूरी हों
बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. मीटिंग के बाद पीडीपी प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के लोग पांच अगस्त 2019 के बाद बहुत मुश्किलों में हैं.वे गुस्से में हैं, परेशान हैं और भावनात्मक रूप से टूट चुके हैं.वे अपमानित महसूस कर रहे हैं. मैंने पीएम से कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग जिस तरह से अनुच्छेद 370 को असंवैधानिक, अवैध और अनैतिक रूप से निरस्त किया गया,उसे स्वीकार नहीं करते |



कोविड से मौत पर परिजनों को ₹4 लाख मुआवजा नहीं दे सकते : केंद्र

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Sunday, June 20, 2021

कोविड से मौत पर परिजनों को ₹4 लाख मुआवजा नहीं दे सकते : केंद्र

नई दिल्ली


केंद्र सरकार ने कहा है कि वह कोविड के कारण मरने वाले व्यक्तियों के परिजनों को चार लाख रुपये की मुआवजा राशि नहीं दी जा सकती है. कोविड से मौत पर परिजनों को चार लाख रुपये के मुआवजे की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्र ने यह बात कही

केंद्र ने कहा है कि वित्तीय बाधाओं और अन्य कारकों के कारण परिजनों को मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता है

केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

केंद्र के हलफनामे में कहा गया है कि अगर कोविड से जान गंवाने वाले व्यक्तियों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है तो इससे राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) का सारा पैसा इसी में खर्च हो जाएगा

सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि केंद्र और सभी राज्य सरकारों ने कोविड -19 महामारी से निपटने के लिए, जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए बड़ी मात्रा में खर्च किया है, और उनका वित्तीय खर्च पहले से ही अत्यधिक बढ़ा हुआ है

साथ ही केंद्र ने स्पष्ट किया कि उसने पहले ही भुगतान कर दिया है और जरूरतमंद व्यक्तियों की मदद के लिए कई कदम उठाए गए हैं

जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं को दिल्ली में पीएम के साथ बैठक के लिए किया गया आमंत्रित

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जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं को दिल्ली में पीएम के साथ बैठक के लिए किया गया आमंत्रित

नई दिल्ली


राजधानी दिल्ली में 24 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi ) की अध्यक्षता में होने वाली एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल होने के लिए जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं को शनिवार को आमंत्रित किया गया जिसमें तत्कालीन राज्य के चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. उम्मीद है कि इस बैठक में वहां विधानसभा चुनाव कराने की रूपरेखा तय होगी

आठ राजनीतिक दलों - नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), पीडीपी, भाजपा, कांग्रेस, जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी, माकपा, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के इन नेताओं को बृहस्पतिवार को अपराह्न 3 बजे प्रधानमंत्री आवास पर होने वाली बैठक में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने टेलीफोन करके आमंत्रित किया.यह पांच अगस्त 2019 के बाद प्रधानमंत्री के साथ जम्मू कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों के साथ होने वाली पहली बैठक होगी जब केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था. पूर्ववर्ती राज्य में नवम्बर 2018 से केंद्र का शासन है

अधिकारियों ने कहा कि केंद्र केंद्र शासित प्रदेश में जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव कराने का इच्छुक है, जो या तो दिसंबर में या अगले साल मार्च में होने की संभावना है, जब न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर देसाई की अध्यक्षता वाला परिसीमन आयोग अगले कुछ महीने में निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने का अपना काम पूरा कर लेगा. आयोग को इस साल मार्च में एक साल का विस्तार दिया गया था

अधिकारियों ने कहा कि सभी नेताओं को एक कोविड-19 नेगेटिव प्रमाणपत्र के साथ आने के लिए कहा गया है.आमंत्रितों में चार पूर्व मुख्यमंत्री - नेशनल कांफ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती शामिल हैं

महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा सांसद राणे समर्थकों के बीच झड़प

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Saturday, June 19, 2021

महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा सांसद राणे समर्थकों के बीच झड़प

मुंबई

महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के कुदाल में शनिवार को शिवसेना के स्थापना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिवसेना के समर्थकों और भाजपा सांसद नारायण राणे के बीच झड़प हो गई. पुलिस ने यह जानकारी दी

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिवसेना के स्थानीय विधायक वैभव नाइक और उनके समर्थकों ने पार्टी के स्थापना दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया था और यहां शनिवार सुबह कुदाल में वे एक पेट्रोल पंप पर ईंधन खरीदने आए वाहन मालिकों को पैसे बांट रहे थे. उन्होंने बताया कि भाजपा के राज्यसभा सदस्य एवं शिवसेना के पूर्व नेता नारायण राणे का करीबी पंप का संचालन करता है

अधिकारी ने बताया कि भाजपा समर्थक वहां एकत्र हो गए और नाइक के खिलाफ नारेबाजी करने लगे जिससे उनके बीच तीखी बहस और झड़प हुई. सूचना पर आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं को तितर-बितर कर दिया. उन्होंने बताया कि नाईक और उनके समर्थकों ने पास के ही एक अन्य पेट्रोल पंप पर उसी कार्यक्रम का आयोजन किया

उन्होंने बताया कि कुदाल पुलिस थाने में शिवसेना विधायक और उनके 12 समर्थकों और भाजपा के आनंद शिरवाइकर और 20 अन्य लोगों के खिलाफ गैरकानूनी ढंग से एकत्र होने, लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा से संबंधित आईपीसी की धाराओं के तहत और कोविड-19 से संबंधित नियमों के उल्लंघन के लिए एक प्राथमिकी दर्ज की गई है. अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है


अलविदा मिल्खा : राजकीय सम्मान के साथ हुआ 'फ्लाइंग सिख' का अंतिम संस्कार

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अलविदा मिल्खा : राजकीय सम्मान के साथ हुआ 'फ्लाइंग सिख' का अंतिम संस्कार

चंडीगढ़

देश को राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में गोल्ड मेडल (Gold Medal) दिलाने वाले मशहूर धावक मिल्खा सिंह (Flying Sikh Milkha Singh) का आज चंडीगढ़ के सेक्टर-25 (Chandigarh Sec-25) के श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मिल्खा सिंह के सम्मान में एक दिन के राजकीय शोक का एलान किया है.इस दौरान श्मशान घाट में उनके परिजन, नजदीकी रिश्तेदार और कई पुलिस अधिकारी मौजूद रहे


राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह का बीती रात निधन हो गया था. एक महीने पहले वह कोरोना संक्रमित हुए थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी तबीयत में सुधार हो रहा था. बीते बृहस्पतिवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया
Rewa Times Now

छत्तीसगढ़ : ऐसे हुआ प्यार का अंत, नाबालिग प्रेमी ने की प्रेमिका की हत्या

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Monday, June 14, 2021


जहांगीर-चांपा

छत्तीसगढ़ के बिर्रा थाना अंर्तगत ग्राम पंचायत किकिरदा में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां प्रेम-प्रसंग में नाबालिग प्रेमी ने अपनी नाबालिग प्रेमिका की गला दबाकर हत्या कर दी. हत्या के बाद प्रेमी खुद ही थाना पहुंचा और उसने सरेंडर भी कर दिया. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है

जानकारी के अनुसार किकिरदा में एक प्रेमी ने खुद को प्रेमिका का हत्यारा बताकर सरेंडर किया. (girlfriend killer arrested ) उसने जानकारी दी कि स्कूल में पढ़ने के दौरान उसका प्रेम-प्रसंग एक लड़की से हुआ था. दोनो एक दूसरे से प्यार करते थे. शनिवार की रात 12 बजे उसने प्रेमिका को मिलने के लिए बुलाया था. प्रेमिका के साथ वह नदी के घाट में बैठा था. इसी दौरान प्रेमिका प्रेमी से शादी के लिए जिद करने लगी. प्रेमिका कहने लगी की उसे अपने साथ घर ले जाए लेकिन प्रेमी उसे घर नहीं ले जाना चाहता था

प्रेमिका की जिद बना हत्या का कारण

प्रेमिका का जिद्द करना उसे महंगा पड़ गया. दरअसल प्रेमी उसे घर नहीं ले जाने की बात कह रहा था, लेकिन प्रेमिका शादी कर उसके घर जाने की बात कह रही थी.ऐसे में प्रेमी को गुस्सा आया और उसने तैश में आकर गमक्षा से प्रेमिका का गला दबा दिया. जिससे वह अधमरी हो गई, लेकिन इसके बाद प्रेमी डर गया. उसने अपराध छिपाने के लिए प्रेमिका को नदी में डुबा दिया

पुलिस ने बरामद किया शव

पुलिस को जब इस बात की जानकारी हुई तो उसके होश उड़ गए. 3 घंटे कि मशक्कत के बाद ग्रामीणों के सहयोग से नदी में शव की खोजबीन कर किकिरदा के नेगरुडीह घाट से बरामद किया गया है. घटना में प्रयुक्त गमक्षा को भी जब्त किया है. बता दें प्रेमी-प्रेमिका दोनों ही नाबालिग हैं

करीब 1 घंटे चली पीएम मोदी और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ की मुलाकात

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Friday, June 11, 2021



उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे का शुक्रवार को दूसरा दिन है। योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 10.40 बजे प्रधानमंत्री आवास पहुंचे और दोनों नेताओं के बीच सवा घंटे से अधिक समय तक मुलाकात चली। पीएम से मुलाकात के बाद योगी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भेंट करने उनके घर गए। इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर शुरू हुई अटकलों के बीच Yogi Adityanath का यह दौरा बहुत अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन सभी मुलाकातों में Yogi Adityanath मुख्यतः कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप और उससे निपटने की राज्य सरकार की कोशिशों पर बात करेंगे। वैक्सीन आवंटन में जनसंख्या को आधार बनाने का भी आग्रह करेंगे। लेकिन सूत्रों का कहना है कि शाह से बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव के समीकरण, इस लिहाज से नए साथी दलों व प्रभावी चेहरों की तलाश पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात में भी इन्हीं बिंदुओं पर चर्चा हो सकती है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के साथ ही राज्य में बहुत जल्द छोटा मंत्रिमंडल विस्तार संभव है। बल्कि इसकी अटकलें भी तेज हो गई हैं कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के चुनाव में उतरने से पहले ही केंद्र में भी बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार हो सकता है।

Yogi Adityanath के दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर पहुंचने के साथ ही राजनीति गर्म रही। हालांकि Yogi Adityanath के नजदीकियों का कहना है कि यह दौरा पूरी तरह औपचारिक है जिसमें मुख्यतः कोरोना की दूसरी लहर में हुए प्रयास और तीसरी लहर की तैयारियों पर जानकारी दी जानी है। राज्य में कुछ केंद्रीय परियोजनाओं की गति बढ़ाने पर भी आग्रह किया जा सकता है। लेकिन शाह के साथ लगभग डेढ़ घंटे चली बैठक ने साफ संकेत दिए कि चर्चा राजनीति और चुनाव पर ज्यादा केंद्रित रही। Yogi Adityanath ने शाह को "प्रवासी संकट का समाधान" पर एक किताब भी सौंपी। बताने की जरूरत नहीं कि चुनाव में प्रवासी भी एक मुद्दा है और योगी यह संदेश देने से नहीं चूके कि उन्होंने प्रवासियों के लिए अच्छा काम किया है

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2021: बाल श्रम को रोके बिना अधूरी है भारत की तरक्की - (लेखक - डॉ राघवेन्द्र सिंह तोमर - बाल अधिकार कार्यकर्ता)

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"मासूम सा फ़रिश्ता है वो, जिसे मां के आंचल में खिलना था, जिस जीवन में हंसना था वो आंसू पीकर मजबूत बना" । इसी प्रकार "जिस देश में बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं वह देश भी सुरक्षित नहीं"। 

बालश्रम की कालिख से ये कैसा बचपन गुजर रहा, ये कैसी गुमनामी के अंधेरे में हमारा देश पनप रहा है? दशकों से भारत बालश्रम के नासूर को ढो रहा है। देश का बचपन अपने सुनहरे सपनों की जगह कभी किसी के घर को चमका रहा है या अपने नाजुक कंधो से बोझा ढोकर अपने परिवार का पेट पाल रहा है। यद्दपि भारत सरकार ने बालश्रम की समस्या को समाप्त करने के लिए अपने कदम उठाए हैं। लेकिन वह सब नाकाफी ही लग रहे है क्योंकि क्रियान्वयन ईमानदारी से नहीं हो रहा है,जिन्हें बचपन को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई है वह सिर्फ कागजी तीर चला रहे है हकीकत से कोसों दूर है ।

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के द्वारा वर्ष 2016 में लिए गए डाटा से पता चलता है कि भारत बाल श्रम से बच्चों को मुक्त करने के मामले में अभी भी मीलों दूर है।

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट 'बाल श्रम के वैश्विक अनुमान, परिणाम और रुझान, 2012-2016' में कहा गया है कि पांच और 17 वर्ष की उम्र के बीच 152 मिलियन बच्चों को अवांछनीय परिस्थितियों में श्रम करने को मजबूर किया जा रहा है।

बचपन बचाओ आंदोलन व कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के आधे से अधिक बच्चों को गरीबी, संघर्ष और लड़कियों के खिलाफ भेदभाव का खतरा है।  ये बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं यहांं तक कि स्वास्थ्य देखभाल तथा भोजन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से भी वंचित रहते हैं। इन बच्चों से उनकी मासूमियत छीन ली गई है और उनका बचपन एवं भविष्य जिसका उन्हें हक़ है वह भी छीन लिया गया है।

क्या है बाल श्रम:-

बाल श्रम आमतौर पर मजदूरी के भुगतान के बिना या भुगतान के साथ बच्चों से शारीरिक कार्य कराना है। बाल श्रम केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, यह एक वैश्विक घटना है। भारतीय संविधान के अनुसार किसी उद्योग, कल-कारखाने या किसी कंपनी में मानसिक या शारीरिक श्रम करने वाले 5 - 14 वर्ष उम्र के बच्चों को बाल श्रमिक कहा जाता है। वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार - 18 वर्ष से कम उम्र के श्रम करने वाले लोग बाल श्रमिक हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार  - बाल श्रम की उम्र 15 साल तय की गई है। अमेरिका में - 12 साल या उससे कम उम्र के लोगों को बाल श्रमिक माना जाता है।

भारत में 1979 में सरकार द्वारा बाल मजदूरी को खत्म करने के उपाय के रूप में गुरूपाद स्वामी समिति का गठन किया गया। जिसके बाद बालश्रम से जुड़ी सभी समस्याओं के अध्ययन के बाद गुरूपाद स्वामी समिति द्वारा सिफारिश प्रस्तुत की गई, जिसमें गरीबी को मजदूरी के मुख्य कारण के रूप में देखा गया और ये सुझाव दिया गया, कि खतरनाक क्षेत्रों में बाल मजदूरी पर प्रतिबंध लगाया जाए एवं उन क्षेत्रों के कार्य के स्तर में सुधार किया जाए। समिति द्वारा बाल मजदूरी करने वाले बच्चों की समस्याओं के निराकरण के लिए बहुआयामी नीति की जरूरत पर भी बल दिया गया।   

1986 में समिति के सिफारिश के आधार पर बाल मजदूरी प्रतिबंध विनियमन अधिनियम अस्तित्व में आया, जिसमें विशेष खतरनाक व्यवसाय व प्रक्रिया के बच्चों के रोजगार एवं अन्य वर्ग के लिए कार्य की शर्तों का निर्धारण किया गया।

इसके बाद सन 1987 में बाल मजदूरी के लिए विशेष नीति बनाई गई, जिसमें जोखिम भरे व्यवसाय एवं प्रक्रियाओं में लिप्त बच्चों के पुर्नवास पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

बच्चों की समस्याओं पर विचार करने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रयास उस समय हुआ, जब अक्टूबर 1990 में न्यूयार्क में इस विषय पर एक विश्व शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें 151 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा गरीबी, कुपोषण व भुखमरी के शिकार दुनिया भर के करोड़ों बच्चों की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस दिशा में बचपन बचाओ आन्दोलन के प्रणेता व विश्व के सबसे बड़े बाल अधिकार कार्यकर्ता श्री कैलाश सत्यार्थी के प्रयास मील के पत्थर साबित हुए । उन्होंने कई बड़ी यात्राएं दुनिया भर में बाल मजदूरी के खात्मे व अनिवार्य शिक्षा के लिए निकाली । बाल व्यापार के विरुद्ध उन्होंने पूरी दुनिया को एकजुट किया । भारत में बड़ी तादाद में बच्चों को बाल श्रम के दलदल से मुक्त ही नहीं कराया बल्कि उनका पूनर्वास भी कराया । उनके नेतृत्व में बाल श्रम के विरुद्ध बड़ा आंदोलन खड़ा किया गया ।

10 अक्टूबर 2006 तक बालश्रम क़ानून को इस असमंजस में रखा गया की किसे खतरनाक और किसे गैर खतरनाक बाल श्रम की श्रेणी में रखा जाए। उसके बाद बाल श्रम निवारण अधिनियम 1986 में संशोधन कर ढाबों, घरों, होटलों में बालश्रम करवाने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया। 

बाल श्रम के कारण:-

हमारे अनुसार बच्चों का किसी संस्था में नियोजन इसलिए किया जाता है, क्योंकि उनका आसानी से शोषण किया जा सकता है। बच्चे अपनी उम्र के अनुरूप कठिन काम जिन कारणों से करते हैं, उनमें आमतौर पर गरीबी पहला कारण है। इसके अलावा, जनसंख्या विस्फोट, सस्ता श्रम, उपलब्ध कानूनों का लागू नहीं होना, बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति अनिच्छुक माता-पिता (वे अपने बच्चों को स्कूल की बजाय काम पर भेजने के इच्छुक होते हैं, ताकि परिवार की आय बढ़ सके) जैसे अन्य कारण भी हैं।

किन - किन रूपों में होता है बाल श्रम ?

बाल मज़दूर - वे बच्चे जो कारखानों, कार्यशालाओं, प्रतिष्ठानों, खानों और घरेलू श्रम जैसे सेवा क्षेत्र में मज़दूरी या बिना मज़दूरी में काम कर रहे हैं।

गली - मोहल्ले के बच्चे - कूड़ा बीनने वाले, अखबार और फेरी लगाने वाले और भीख मांगने वाले।

बंधुआ बच्चे - वे बच्चे जिन्हें या तो उनके माता-पिता ने पैसों की ख़ातिर गिरवी रखा है या जो कर्ज़ को चुकाने के चलने मज़बूरन काम कर रहे हैं।

वर्किंग चिल्ड्रन - वे बच्चे जो कृषि में और घर-गृहस्थी के काम में पारिवारिक श्रम का हिस्सा हैं।

यौन शोषण के लिए इस्तेमाल किए गए बच्चे - हजारों बालिक बच्चे और नाबालिक लड़कियां यौन शोषण की जद में हैं।
घरेलू गतिविधियों में लगे बच्चे - घरेलू सहायता के रूप में काम। इसमें लड़कियों का शोषण सबसे ज़्यादा है - बच्चे छोटे भाई-बहनों की देखभाल, खाना पकाने, साफ-सफाई और ऐसी अन्य घरेलू गतिविधियों में लगे हुए हैं।

बाल श्रम के कारण :- बढ़ती जनसंख्या,गरीबी,खाद्य असुरक्षा,अशिक्षा,बेरोज़गारी,अनाथ होना,मौजूदा क़ानूनों का लागू न होना,सस्ता श्रम ।

बाल श्रम से उत्पन्न समस्या:- 
बाल श्रम एक सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय समस्या है। इसके चलते -बच्चे शिक्षा से दूर हो जाते हैं,स्वास्थ्य पर बुरा असर,बच्चों से दुर्व्यवहार,विस्थापन और असुरक्षित प्रवासन,यौन शोषण के लिए ग़ैर क़ानूनी ख़रीद - फ़रोख़्त (चाइल्ड पोर्नग्राफी),भिक्षावृत्ति,मानवअंगों का कारोबार,बाल अपराध ।
खेल कूद और मनोरंजन जैसे ज़रूरी गतिविधियां प्रभावित:-इन सब के चलते बच्चों का शरीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है जोकि बच्चों के व्यक्तित्व के विकास में मुश्किलें खड़ी करता है।

बाल श्रम के लिए संवैधानिक प्रावधान:-
भारतीय संविधान में बाल मजदूरी पर लगाम लगाने के लिए कई प्रावधान हैं। संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप भारत का संविधान मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धातों की विभिन्न अनुच्छेदों के माध्यम से कहता है- 

अनुच्छेद 15 (3) - बच्चों के लिए अलग से क़ानून बनाने का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 21 - (6 -14) वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार।
अनुच्छेद 23 - बच्चों की ख़रीद और बिक्री पर रोक लगाता है।
अनुच्छेद 24 - 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ख़तरनाक कामों में प्रतिबन्ध लगाया गया है।
अनुच्छेद 39 - नीति निर्देशक सिद्धांत के अंतर्गत आने वाला ये अनुच्छेद में बच्चों के स्वास्थ्य और उनके शारीरिक विकास के लिए ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आदेश देता है। राज्य अपनी नीतियाँ इस तरह निर्धारित करेंगे कि श्रमिकों, पुरुषों और महिलाओं का स्वास्थ्य तथा उनकी क्षमता सुरक्षित रह सके तथा बच्चों की कम उम्र का शोषण न हो एवं आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये वे अपनी उम्र व शक्ति के प्रतिकूल काम में प्रवेश करें।
अनुछेद 45 - नीति निर्देशक सिद्धांत के अंतर्गत आने वाला इस अनुच्छेद में भी 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की देखभाल और शिक्षा की ज़िम्मेदारी राज्यों की है। बच्चों को स्वस्थ तरीके से स्वतंत्र व सम्मानजनक स्थिति में विकास के अवसर तथा सुविधाएँ दी जायेंगी और बचपन व जवानी को नैतिक व भौतिक दुरुपयोग से बचाया जाएगा। 
संविधान लागू होने के 10 साल के भीतर राज्य 14 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेंगे।
बाल श्रम एक ऐसा विषय है, जिस पर संघीय व राज्य सरकारें, दोनों कानून बना सकती हैं। 
अनुच्छेद 51 A - माता पिता पर बच्चों की शिक्षा के लिए अवसर प्रदान करने का एक मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है।

बाल अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय कानून:-

कारखाना अधिनियम 1948 - 14 साल तक की आयु वाले बच्चों को कारखाने में काम करने से रोकता है।15 से 18 वर्ष तक के किशोर किसी फैक्टरी में तभी नियुक्त किये जा सकते हैं, जब उनके पास किसी अधिकृत चिकित्सक का फिटनेस प्रमाण पत्र हो। इस कानून में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिये हर दिन साढ़े चार घंटे की कार्यावधि तय की गई है और उनके रात में काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। धारा 24-  14 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्ट्री या खदान में कार्य करने के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा और ना ही किसी खतरनाक नियोजन में नियुक्त किया जाएगा। न्यायालय ने यह आदेश भी दिया था कि एक बाल श्रम पुनर्वास सह कल्याण कोष की स्थापना की जाए, जिसमें बाल श्रम कानून का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के अंशदान का उपयोग हो।

खदान अधिनियम 1952 - 18 साल से कम आयु वाले बच्चों को खदानों में काम करने पर प्रतिबन्ध लगाता है

अनैतिक तस्करी (बचाव) अधिनियम 1956
बाल श्रम (निषेध व नियमन) कानून 1986- यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी अवैध पेशे और 57 प्रक्रियाओं में, जिन्हें बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के लिये अहितकर माना गया है, नियोजन को निषिद्ध बनाता है। इन पेशों और प्रक्रियाओं का उल्लेख कानून की अनुसूची में है। 

राष्ट्रीय बाल श्रम नीति 1987:-
किशोर न्याय देखभाल और संरक्षण अधिनियम 2000 - बच्चों के रोज़गार को दंडनीय
बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006
राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग 2007 - बाल अधिकारों के उल्लंघन के जुड़े मसले को सुलझाने का काम
निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009
लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015
जरूरत के हिसाब से 1986 के बाल मजदूरी कानून में संशोधन किया गया है ।

बाल श्रम को रोकने के लिए सरकारी योजनाएं:-
बाल फिल्म सोसायटी 1955
एकीकृत बाल संरक्षण योजना (ICPS) 2009 -10
ICPS के तहत अलग - अलग बाल संरक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें -
बाल न्याय के लिए कार्यक्रम।
फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों के लिए एकीकृत कार्यक्रम।
एक ही जगह विस्तृत नियमों और नए कार्यक्रमों सहित देश के भीतर बच्चों को गोद देने को बढ़ावा देने के लिए गृहों (शिशु गृह) को सहायता देने की योजना।
राष्ट्रीय बाल भवन राष्ट्रीय
खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013
बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2016

बाल मज़दूरी से आज़ाद कराए गए बच्चों के पुनर्वास के लिए सरकार ने राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना लागू की थी। इस परियोजना का मक़सद बाल मज़दूरी से आज़ाद कराए गए बच्चों का विशेष स्कूलों में दाख़िला कराया जाता है। जहां उन्हें औपचारिक शिक्षा प्रणाली में डालने से पहले शिक्षा, व्यवसायिक प्रशिक्षण, पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। लेकिन वर्तमान समय में इस परियोजना की स्थिति बहुत दयनीय हो चुकी है । कई वर्षों से कई जिलों में इस परियोजना के फंड को रोक रखा है जिस कारण हजारों बच्चों की छात्रवृति आदि नहीं मिली है साथ स्कूल संचालकों के लाखों रुपये नहीं दिए गए जिस कारण परियोजना की स्थिति गम्भीर बनी हुई है ।

भारत में कुछ गैर सरकारी संगठन भी बाल मज़दूरी को रोकने के लिए काम कर रहे हैं। जिनमें बचपन बचाओं आंदोलन,कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन ने इस दिशा में अनुकरणीय कार्य किये है ।

हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस बाल श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज के साथ-साथ दुनिया भर के लाखों लोगों को जागरूक करता है और उनकी मदद के लिए कई कैंपेन भी चलाए जाते हैं। 

बाल श्रम जिम्मेदार अधिकारियों की आंखों के सामने चलता है और अधिसूचित बाल श्रम कानून शायद ही कभी लागू होते हैं। ये भी सच है की बाल श्रम पर अंकुश लगाने के लिए कई संगठन, आईएलओ आदि प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें भी जिम्मेदार होना चाहिए और अपने कर्तव्यों को बाल श्रम को खत्म करने में मदद करना चाहिए।

अंत में यही बात रखूँगा कि बाल श्रम को रोके बिना भारत की तरक्की अधूरी है क्योंकि अगर बाल श्रम रहेगा तो अशिक्षा,बेरोजगारी व गरीबी बढ़ेगी । जब बड़ों की जगह सस्ते मजदूर के रूप में बच्चे काम करेंगे तो वयस्कों के रोजगार खत्म होंगे जिससे बेरोजगारी, गरीबी बढ़ेगी जब यह सब हो रहा है तो भारत की तरक्की कैसे होगी यह विचारणीय है ।

आज विश्व बाल श्रम प्रतिषेध दिवस पर मैं यही कहूँगा कि बाल अधिकारों के बिना भारत की तरक्की है अपूर्ण, बाल मजदूरी रोककर करो इसे परिपूर्ण।

लेखक- 
डॉ राघवेन्द्र सिंह तोमर 
बाल अधिकार कार्यकर्ता

मंदसौर - शिवना नदी संरक्षण के लिए 100 करोड़ का प्रस्ताव - संपादक शिवभानू सिंह बघेल जी की रिपोर्ट........

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Thursday, June 10, 2021


मंदसौर 9 जून 2021/ प्रदेश में हरित क्षेत्र, प्राण वायु और भू-जल स्तर को बढाने के लिए पर्यावरण विभाग पड़त भूमि पर सघन पौध रोपण करेगा। पर्यावरण मंत्री श्री हरदीप सिंह डंग ने बताया कि इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जाकर मानसून में अधिक से अधिक पौध रोपण के प्रयास किये जायेंगे। पौध रोपण में छायादार-फलदार वृक्षों के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। मंत्री श्री डंग ने यह बात पर्यावरण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कही।श्री डंग ने विभागीय अधिकारियों को कोविड को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण सुधार एवं संरक्षण कार्यो में शासकीय विभागों, आम नागरिक और गैर-शासकीय संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव पर्यावरण श्री मलय श्रीवास्तव और सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड श्री ए.के.मिश्रा बैठक में उपस्थित थे। 

अंकुर अभियान में 32 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन

मंत्री श्री डंग ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदेश को नैसर्गिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए न केवल शासकीय बल्कि वैयक्तिक स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। श्री चौहान रोज अपने हाथों से पौधा रोपित कर रहे हैं। पर्यावरण दिवस 5 जून पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आरंभ "अंकुर" अभियान में अब तक 32 हजार प्रतिभागियों द्वारा पंजीयन कराया जा चुका है। इनमें से लगभग 14 हजार प्रतिभागी वायुदूत एप में रोपित पौधों की फोटो अपलोड कर चुके हैं। छायादार-फलदार पौध रोपण का यह जन-सहभागिता का कार्यक्रम प्रदेश को आगामी वर्षो में भरपूर ऑक्सीजन एवं जल उपलब्धता में सहायक होगा। 

मंत्री श्री डंग ने कहा कि गिट्टी क्रशर मालिक पौध संरक्षण की सतत जानकारी पर्यावरण विभाग को देंगे।उन्होंने कहा कि गिट्टी क्रशर के आसपास हरियाली की कमी न हो। ग्रीन लेयर स्टोन डस्ट को सोखकर ऑक्सीजन की कमी को दूर करती है। स्टोन क्रशर मालिक अनिवार्य रूप से स्थल के आसपास वृक्षारोपण कर उनका संरक्षण करें और इसकी जानकारी समय-समय पर पर्यावरण विभाग को देते रहें। श्री डंग ने विभागीय अधिकारियों से भी पौध संरक्षण कार्य की निगरानी करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि विभिन्न उद्योगों एवं संयंत्रों को पर्यावरणीय स्वीकृति एवं उनके संचालन के लिए दी जाने वाली सम्मति में वृक्षारोपण की संख्या निर्धारित किए जाने के संबंध में स्पष्ट उल्लेख किया जाए एवं सतत् रूप से मॉनिटरिंग की जाए। 

शिवना नदी संरक्षण के लिए 100 करोड़ का प्रस्ताव

मंत्री श्री डंग ने एप्को द्वारा संचालित जल संरक्षण योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण् करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने बताया कि तालाब-नदी संरक्षण योजना में शिवना नदी के संरक्षण के लिए केंद्र शासन को 100 करोड़ रूपये की राशि का प्रस्ताव भेजा गया है।
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