भोपाल
मध्य प्रदेश के एक करोड़ 62 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ता दोहरी मार झेलने के लिए तैयार हो जाएं विद्युत नियामक आयोग बिजली की दरों में वृद्धि का निर्णय कभी भी ले सकता है इसके साथ करीब आधा दर्जन सुविधाओं का शुल्क भी बढ़ाया जा रहा है इससे नए और पुराने उपभोक्ता समान रूप से प्रभावित होंगे 2,629 करोड़ रुपये घाटे की भरपाई के लिए बिजली कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए आयोग से बिजली की दरों में 6.23 फीसद की बढ़ोत्तरी की अनुमति हासिल करने पर कवायद प्रारंभ कर दी है। इस प्रस्ताव पर हाई कोर्ट जबलपुर ने 16 मार्च को रोक लगाई थी, जो मंगलवार को हटा ली है
विधानसभा चुनाव, उपचुनाव सहित अन्य कारणों से प्रदेश में तीन साल से तय समय (अप्रैल) में बिजली की नई दरें लागू नहीं हो पा रही हैं वित्तीय वर्ष 2020-21 की दरें (1.98 फीसद वृद्धि के साथ 17 दिसंबर 2020 को लागू करना पड़ी थीं बिजली कंपनियां वित्तीय वर्ष 2021-22 का प्रस्ताव भी तैयार कर चुकी थीं, जिसमें 2,629 करोड़ रुपये का घाटा बताते हुए 6.23 फीसद की वृद्धि की इजाजत मांगी थी कंपनियों की कोशिश थी इन प्रस्ताव को मार्च में मंजूरी मिल जाए, ताकि अप्रैल से नई दरें लागू कर दी जाएं, पर ऐसा नहीं हो सका।
टीकमगढ़ के वकील निर्मल लोहिया ने आठ मार्च को जबलपुर हाई कोर्ट में याचिका लगा दी। उसमें तर्क दिया गया आयोग ने उपभोक्ताओं को सुनवाई का मौका नहीं दिया। आखिर हाई कोर्ट ने 15 मार्च को बिजली दर वृद्धि के प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। दो दिन पहले सुनवाई पूरी होने के बाद मंगलवार को कोर्ट ने रोक हटा दी है।
सेवा शुल्कों में भी 60 से 70 फीसद वृद्धि की तैयारी
बिजली कंपनियां नए बिजली कनेक्शन, मीटर की जांच, लोड वृद्धि, नाम परिवर्तन और कट चुके कनेक्शन दोबारा जुड़वाने जैसे विभिन्न् सेवा शुल्कों में भी 60 से 70 फीसद तक वृद्धि की तैयारी कर चुकी हैं। कंपनियों ने वर्ष 2009 के बिजली नियमों में बदलाव करते हुए आयोग के समक्ष शुल्क बढ़ाने की याचिका पेश की है। इस पर आयोग ने पांच जुलाई तक दावे-आपत्ति मांगे हैं। छह जुलाई को याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें तय होगा कितना शुल्क बढ़ेगा।
No comments
Post a Comment